जय संतोषी माता, जय संतोषी माता।
अपने सेवक जन की, सुख सम्पति दाता॥
जय संतोषी माता।
सुनो माँ मेरी अरजी, हो जाओ प्रसन्न।
कोटि दोष हैं माता, कर दो मन निर्मल॥
जय संतोषी माता।
सोने का सिंहासन, चाँदी का छत्र।
केवड़े का चँवर झलावे, घूपें दीप नित्र॥
जय संतोषी माता।
कनक कलश भर मेवा, चीनी गुड़ चढ़ावे।
गेहूँ के आटे से, रोट बना लावे॥
जय संतोषी माता।
शुक्रवार को माता तुम्हारा व्रत करता।
दुख दरिद्र दूर हो जाता, मन हुलसता॥
जय संतोषी माता।
भक्ति भावना से जो कोई पूजे।
ताके मन की इच्छा पूरी होय तुरी जे॥
जय संतोषी माता।
नहीं लगे खट्टे पदार्थ पूजा में।
मिले मनचाहा वर भक्ति की रूजा में॥
जय संतोषी माता।
जय संतोषी माता, जय संतोषी माता।
अपने सेवक जन की, सुख सम्पति दाता॥
Santoshi Mata is worshipped on Fridays (Shukrawar) by millions of Hindu women. Devotees observe a fast (vrat) eating only one meal without any sour food. After 16 consecutive Fridays, a Udyapan ceremony is performed. She is considered the goddess of contentment and satisfaction and is believed to fulfil all wishes of devoted worshippers.
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